श्रीशैलम्

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श्रीशैलम्
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इस मंदिर का मूल उद्गम अज्ञात है। स्कंद पुराण में श्री शैल काण्ड नाम का अध्याय है। इसमें उपरोक्त मंदिर का वर्णन है। इससे इस मंदिर की प्राचीनता का पता चलता है। तमिल संतों ने भी प्राचीन काल से ही इसकी स्तुति गायी है। कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने जब इस मंदिर की यात्रा की, तब उन्होंने शिवानन्दलहरी की रचना की थी। श्री शैलम का प्राचीन हिन्दू पुराणों और ग्रंथ महाभारत में भी सन्दर्भ आता है।




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