झज्जर

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झज्‍जर की स्थापना छज्जु नाम के एक जाट ने की थी। पहले इसका नाम 'छज्जु नगर' था लेकिन बाद में यह झज्जर हो गया। इसके अलावा यहां की झज्ज्री (सुराही) बहुत मशहूर थी तो भी इसका नाम झज्जर पडा। झझर-360 गाँव की प्रधानी:-दिवान पंडित राम रिछपालसिंह अत्रि के दशोरी काज के समय जब इनके वंशजो ने रियासत के भाईचारे को इकठ्ठा किया था, उसी पंचायत में दिवान परिवार को झझर-360 गाँव की प्रधानी दी गई थी।इस एरिया का ये प्रथम देशोरी काज माना जाता है, उस जमाने में 7 दिन तक इस आयोजन की कढ़ाई चढ़ी थी।👑झझर-360 के पहले प्रधान पंडित दिवानजीलाल अत्रि👑 हुए हैं। झझर-360 की प्रधानी प्राचीन परंपरा के अनुसार झझर के अत्रि ब्राह्मणों के पास 7 पीढ़ी से चली आ रही है। अब तक जानकारी के अनुसार उतर भारत में ये पहली 360-गाँव की प्रधानी है, जो ब्राह्मणों को मिलने का गौरव प्राप्त हुआ है।360 की प्रधानी के कारण परिवार को "चौधरी की उपाधि" भी मिली थी।वर्तमान समय में झझर-360  के प्रधान दिवान पं० सुभाष अत्रि जी हैं, जो शहर के धार्मिक, सामाजिक, राजनितिक रूप से रसुखदार व्यक्ति हैं। झज्जर के दो मुख्य शहर बहादुरगढ़ और बेरी है। बहादुरगढ़ की स्थापना राठी जाटों ने की थी। पहले बहादुरगढ़ को सर्राफाबाद के नाम से जाना जाता था। पिछले दिनों बहादुरगढ़ का तेजी से औद्योगिकरण हुआ है। बेरी इसका दूसरा मुख्य शहर है। यहां भीमेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मन्दिर है। इस मन्दिर में पूजा करने के लिए देश-विदेश से पर्यटक प्रतिवर्ष आते हैं। मन्दिरों के अलावा पर्यटक यहां पर भिंडावास पक्षी अभ्यारण घूमने भी जा सकते हैं।

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