अछनेरा

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अछनेरा जनपद आगरा का मशहूर कसवा है ।अतीत की अनेक गौरव पूर्ण गाथाएँ यह कसवा अपने में समाहित किए हुए है।भारत भूमि सदयेव से ही बहादुर योध्ययों की जन्म व कर्म भूमि रही है ।सर्व धर्म साम्भाव देश का सर्व प्रिय आचरण रहा है तथा संस्कार इन सब का आधार ।आचरण व संस्कारों के बारे मैं विश्व सदैव ही अपने देश को आशा भरी निगाहों से निहारता रहा है ।कसवे के नामकरण की गाथा यह है कि यहॉं दो घनिष्ठ मित्र रहते थे जिनके नाम थे अछन खॉं और किशन नेहरा।देनों की दोस्ती के क़िस्से बहुत दूर दूर तक मशहूर थे।लोग मिसाल देते थे कि वे दो बदन एक जान हैं।अच्छन खॉं होली का त्योहार बढ़े उत्साह से मनाते तो नेहरा भी रमज़ान व ईद मनाने में कोई कसर न छोड़ते। एक दिन दोनों दोस्त नदी में नहाने के लिए गये।देखते-देखते किशन नेहरा गहरे पानी में चले गये और डूबने लगे।उनको अपनी जान बचाने के सारे प्रयास निष्फल लगने लगे।अच्छन ने जब अपने दोस्त को डूबते देखा तो उसकी जान बचाने के लिये पानी में छंलाग लगा दी । नेहरा ने पानी की गहराई का अनुभव कर अच्छन को अपनी ओर आने से मना किया किंतु सच्चा दोस्त ऐसा कैसे कर सकता था।अच्छन तीर की तरह अपने दोस्त के पास पहुँचे तथा उसे बचाने का भसकर प्रयास करने लगे किंतु पानी की गहराई और धारा का वेग दोस्तों की महनत पर भारी पड़ने लगा।किनारे पर खड़े लोग दोनों की जान बचाने के लिये ईश्वर से प्रार्थना करते रहे किंतु करतार को कुछ और ही मंज़ूर था।देखते ही देखते दोनों दोस्त पानी में समा गये।नगर में कोहराम मच गया ।हर कोई नदी की ओर दौड़ा जा रहा था ।गोताखोरों के अथक प्रयास से दोनों की लाशें निकाली गईं।उस समय भी दोनों एक दूसरे का हाथ थामे हुए थे।दोनों दोस्तों के सम्मान में क़सबे का नाम “अच्छन-नेहरा” कर दिया गया जो कालांतर में “अछनेहरा” तथा आगे चल कर “अछनेरा” हो गया।मान्यता है कि यहॉं के लोग सच्चे और अच्छे तथा यारों के यार होते हैं।

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