बलाचौर

Nederlands Português Español Tiếng Việt English Italiano Bahasa Melayu 中文

कछवाहा राजपूत राज देव ने १६वीं शताब्दी मे पहली बार बला चौर मे आकर रहना शुरू किया अपने परिवार के साथ, उनका संबध जयपुर के राज घराने के साथ था। राज देव ने यहा भक्ति करनी शुरू की और इस जगह का नाम अपने पुत्र बलराज देव के नाम पर रखा। राज देव की मृत्यु १५९६ मे हुई। स्थानिया लोगो ने उनकी मज़ार बनाई और उसे बाबा बलराज के नाम से पूजने लगे। आज भी बाबा बलराज का मंदिर बला चौर मे स्थित है, मंदिर की देख रेख के लिए मंदिर कमेटी भी बनाई गयी १९४९ मे जिनके संरक्षक बलवंत सिंह थे। १५३९ मे शेरशाह सूरी ने हुमायूँ पर हमला करने से पहले यही पर बाबा राज देव से आशीष ली थी।

Wikipedia



Impressum